Q. अर्थव्यवस्था के क्षेत्रक से क्या अभिप्राय है?
Ans. आर्थिक गतिविधियों को उनकी प्रकृति के आधार पर अलग-अलग समूहों में बाँटा जाता है। इन समूहों को अर्थव्यवस्था के क्षेत्रक कहते हैं।
Q. प्राथमिक क्षेत्रक क्या है?
Ans. जिस क्षेत्रक में प्राकृतिक संसाधनों से सीधे वस्तुएँ प्राप्त की जाती हैं, उसे प्राथमिक क्षेत्रक कहते हैं। कृषि, मछली पालन, वानिकी और खनन इसके उदाहरण हैं।
Q. द्वितीयक क्षेत्रक क्या है?
Ans. जिस क्षेत्रक में प्राथमिक क्षेत्रक से प्राप्त कच्चे माल को संसाधित करके नई वस्तुएँ बनाई जाती हैं, उसे द्वितीयक क्षेत्रक कहते हैं। कपड़ा उद्योग और चीनी उद्योग इसके उदाहरण हैं।
Q. तृतीयक क्षेत्रक क्या है?
Ans. तृतीयक क्षेत्रक वह क्षेत्रक है जो अन्य आर्थिक गतिविधियों को सेवाएँ प्रदान करता है। परिवहन, बैंकिंग, शिक्षा, स्वास्थ्य और संचार इसके उदाहरण हैं।
Q. प्राथमिक क्षेत्रक को कृषि एवं संबंधित क्षेत्रक क्यों कहा जाता है?
Ans. क्योंकि इसमें कृषि तथा प्राकृतिक संसाधनों पर आधारित गतिविधियाँ, जैसे पशुपालन, मत्स्य पालन और वानिकी शामिल हैं।
Q. सकल घरेलू उत्पाद (GDP) क्या है?
Ans. किसी देश की सीमाओं के भीतर एक निश्चित अवधि, सामान्यतः एक वर्ष, में उत्पादित सभी अंतिम वस्तुओं और सेवाओं के मौद्रिक मूल्य को सकल घरेलू उत्पाद कहते हैं।
Q. अंतिम वस्तुओं और सेवाओं का मूल्य क्यों गिना जाता है?
Ans. दोहरी गणना से बचने के लिए अंतिम वस्तुओं और सेवाओं का मूल्य गिना जाता है। मध्यवर्ती वस्तुओं का मूल्य अंतिम वस्तु के मूल्य में शामिल हो सकता है।
Q. भारत में तृतीयक क्षेत्रक का महत्व क्यों बढ़ा है?
Ans. शिक्षा, स्वास्थ्य, परिवहन, संचार, बैंकिंग और सूचना प्रौद्योगिकी जैसी सेवाओं की माँग बढ़ने तथा कृषि और उद्योग को सेवाओं की आवश्यकता होने से तृतीयक क्षेत्रक का महत्व बढ़ा है।
Q. छिपी हुई बेरोजगारी क्या है?
Ans. जब किसी काम में आवश्यकता से अधिक लोग लगे हों और कुछ लोगों को हटाने पर भी कुल उत्पादन में कमी न आए, तो इसे छिपी हुई बेरोजगारी कहते हैं।
Q. ग्रामीण क्षेत्रों में छिपी हुई बेरोजगारी का उदाहरण दीजिए।
Ans. किसी छोटे खेत पर पाँच लोगों की आवश्यकता होने के बावजूद आठ लोगों का काम करना इसका उदाहरण है, यदि तीन लोगों को हटाने पर भी उत्पादन में कमी न आए।
Q. अल्परोजगार से क्या अभिप्राय है?
Ans. जब कोई व्यक्ति अपनी क्षमता या उपलब्ध कार्य-समय के अनुसार पर्याप्त काम नहीं प्राप्त कर पाता, तो उसे अल्परोजगार की स्थिति कहा जाता है।
Q. संगठित क्षेत्रक क्या है?
Ans. संगठित क्षेत्रक में वे प्रतिष्ठान शामिल होते हैं जो सरकार के नियमों के अंतर्गत पंजीकृत होते हैं और जहाँ रोजगार की शर्तें तथा श्रमिकों के अधिकार सामान्यतः अधिक औपचारिक होते हैं।
Q. असंगठित क्षेत्रक क्या है?
Ans. असंगठित क्षेत्रक में छोटे या अनियमित प्रतिष्ठान और ऐसी रोजगार गतिविधियाँ शामिल होती हैं जहाँ नौकरी की सुरक्षा, नियमित वेतन और सामाजिक सुरक्षा का अभाव हो सकता है।
Q. संगठित क्षेत्रक के श्रमिकों को कौन-कौन से लाभ मिल सकते हैं?
Ans. नियमित वेतन, सवेतन अवकाश, भविष्य निधि, पेंशन या अन्य सामाजिक सुरक्षा लाभ मिल सकते हैं। वास्तविक लाभ लागू नियमों और रोजगार की शर्तों पर निर्भर करते हैं।
Q. असंगठित क्षेत्रक के श्रमिकों की सुरक्षा क्यों आवश्यक है?
Ans. क्योंकि उन्हें कम वेतन, अनियमित काम, नौकरी की असुरक्षा और सामाजिक सुरक्षा की कमी जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।
Q. सार्वजनिक क्षेत्रक क्या है?
Ans. जिस क्षेत्रक में परिसंपत्तियों का स्वामित्व और नियंत्रण मुख्यतः सरकार के पास होता है, उसे सार्वजनिक क्षेत्रक कहते हैं। सरकारी विद्यालय और सरकारी अस्पताल इसके उदाहरण हैं।
Q. निजी क्षेत्रक क्या है?
Ans. जिस क्षेत्रक में परिसंपत्तियों का स्वामित्व और संचालन निजी व्यक्तियों या कंपनियों के पास होता है, उसे निजी क्षेत्रक कहते हैं। निजी दुकानें और निजी कंपनियाँ इसके उदाहरण हैं।
Q. सार्वजनिक क्षेत्रक की प्रमुख भूमिका क्या है?
Ans. सार्वजनिक क्षेत्रक आवश्यक सार्वजनिक सेवाएँ उपलब्ध कराने, बुनियादी ढाँचा विकसित करने और समाज के कमजोर वर्गों तक सुविधाएँ पहुँचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
Q. मनरेगा का प्रमुख उद्देश्य क्या है?
Ans. महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम का उद्देश्य ग्रामीण परिवारों के वयस्क सदस्यों को माँग के आधार पर निर्धारित शर्तों के अनुसार एक वित्तीय वर्ष में 100 दिनों तक अकुशल शारीरिक काम की वैधानिक रोजगार गारंटी प्रदान करना है।
Q. रोजगार के अवसर बढ़ाने के लिए कौन-से उपाय किए जा सकते हैं?
Ans. सिंचाई, ग्रामीण सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, लघु उद्योग, खाद्य प्रसंस्करण, कौशल प्रशिक्षण और छोटे व्यवसायों को बढ़ावा देकर रोजगार के अवसर बढ़ाए जा सकते हैं।