❓ Question Answer

Chapter 11 - प्राणेभ्योऽपि प्रियः सुहृद्

Q. प्राणेभ्योऽपि प्रियः सुहृद् का हिंदी अर्थ क्या है?
Ans. मित्र प्राणों से भी अधिक प्रिय होता है।
Q. इस पाठ का मुख्य विषय क्या है?
Ans. सच्ची मित्रता और संकट के समय मित्र की पहचान।
Q. सच्चे मित्र की पहचान कब होती है?
Ans. संकट और कठिन परिस्थितियों में।
Q. दो मित्र कहाँ जा रहे थे?
Ans. दो मित्र एक वन से होकर जा रहे थे।
Q. वन में दोनों मित्रों के सामने कौन-सा संकट आया?
Ans. उनके सामने एक भालू आ गया।
Q. भालू को देखकर एक मित्र ने क्या किया?
Ans. वह पेड़ पर चढ़ गया।
Q. दूसरे मित्र ने अपनी रक्षा के लिए क्या उपाय किया?
Ans. वह जमीन पर साँस रोककर मृत व्यक्ति की तरह लेट गया।
Q. भालू ने जमीन पर लेटे मित्र के साथ क्या किया?
Ans. भालू ने उसे सूँघा और मृत समझकर वहाँ से चला गया।
Q. पेड़ पर चढ़े मित्र ने नीचे आकर क्या पूछा?
Ans. उसने पूछा कि भालू ने उसके कान में क्या कहा था।
Q. दूसरे मित्र ने भालू के बारे में क्या उत्तर दिया?
Ans. उसने कहा कि संकट में साथ छोड़ने वाले मित्र पर विश्वास नहीं करना चाहिए।
Q. कहानी में किस पशु का वर्णन है?
Ans. भालू का।
Q. सच्चे मित्र का प्रमुख गुण क्या है?
Ans. संकट में साथ देना और सहायता करना।
Q. स्वार्थी मित्र की पहचान क्या है?
Ans. वह अपने लाभ के लिए संकट में मित्र को अकेला छोड़ सकता है।
Q. मित्रता में विश्वास क्यों आवश्यक है?
Ans. विश्वास से मित्रता मजबूत होती है और आपसी संबंध बने रहते हैं।
Q. संकट के समय मित्र को क्या करना चाहिए?
Ans. मित्र की सहायता करनी चाहिए और उसे अकेला नहीं छोड़ना चाहिए।
Q. इस कहानी में पेड़ पर चढ़ने वाले मित्र का व्यवहार कैसा था?
Ans. उसने अपनी सुरक्षा की चिंता की और दूसरे मित्र को अकेला छोड़ दिया।
Q. जमीन पर लेटे मित्र ने संकट में कैसी बुद्धिमानी दिखाई?
Ans. उसने भालू से बचने के लिए मृत होने का अभिनय किया।
Q. प्राणेभ्योऽपि प्रियः सुहृद् शीर्षक की सार्थकता क्या है?
Ans. यह शीर्षक सच्चे मित्र के महत्व को दर्शाता है, जो प्राणों से भी प्रिय होता है।
Q. कहानी से विद्यार्थियों को क्या शिक्षा मिलती है?
Ans. मित्र का चुनाव सोच-समझकर करना चाहिए और सच्चे मित्र की सहायता करनी चाहिए।
Q. कहानी का मुख्य संदेश क्या है?
Ans. सच्चा मित्र वही है जो संकट में साथ दे, न कि केवल सुख के समय।

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