❓ Question Answer

Chapter 14 - संघवाद

Q. संघवाद क्या है?
Ans. संघवाद शासन की वह व्यवस्था है जिसमें सत्ता का बँटवारा केंद्र सरकार और क्षेत्रीय सरकारों, जैसे राज्य सरकारों, के बीच संविधान के अनुसार किया जाता है।
Q. संघीय शासन व्यवस्था की दो प्रमुख विशेषताएँ बताइए।
Ans. संघीय व्यवस्था में सरकार के दो या अधिक स्तर होते हैं और प्रत्येक स्तर की शक्तियाँ संविधान द्वारा निर्धारित होती हैं। सामान्यतः कोई एक स्तर दूसरे की शक्तियाँ मनमाने ढंग से नहीं छीन सकता।
Q. संघीय व्यवस्था में संविधान की क्या भूमिका है?
Ans. संविधान केंद्र और राज्य सरकारों की शक्तियों तथा अधिकार क्षेत्रों को निर्धारित करता है। विवाद होने पर न्यायपालिका संविधान की व्याख्या करके उनका समाधान करती है।
Q. संघीय व्यवस्था में सत्ता का बँटवारा क्यों आवश्यक है?
Ans. सत्ता का बँटवारा राष्ट्रीय एकता बनाए रखने, क्षेत्रीय विविधताओं का सम्मान करने, प्रशासन को प्रभावी बनाने और विभिन्न क्षेत्रों को निर्णय लेने का अवसर देने के लिए आवश्यक है।
Q. संघीय और एकात्मक शासन व्यवस्था में क्या अंतर है?
Ans. संघीय व्यवस्था में केंद्र और क्षेत्रीय सरकारों की शक्तियाँ संविधान द्वारा बाँटी जाती हैं। एकात्मक व्यवस्था में अधिकांश शक्तियाँ केंद्रीय सरकार के पास केंद्रित होती हैं, यद्यपि वह स्थानीय निकायों को अधिकार दे सकती है।
Q. संघवाद के दो प्रमुख प्रकार कौन-से हैं?
Ans. संघवाद के दो प्रमुख प्रकार हैं—साथ आकर संघ बनाना (Coming Together Federation) और साथ रखकर संघ बनाए रखना (Holding Together Federation)।
Q. साथ आकर संघ बनाने का क्या अर्थ है?
Ans. जब स्वतंत्र राज्य अपनी सुरक्षा और साझा हितों के लिए मिलकर संघ बनाते हैं तथा अपनी कुछ शक्तियाँ केंद्रीय सरकार को सौंपते हैं, तो इसे साथ आकर संघ बनाना कहते हैं। उदाहरण: अमेरिका और स्विट्जरलैंड।
Q. साथ रखकर संघ बनाए रखने का क्या अर्थ है?
Ans. जब एक बड़ा देश अपनी विविधता और प्रशासनिक आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर सत्ता को केंद्र तथा विभिन्न राज्यों के बीच बाँटता है, तो इसे साथ रखकर संघ बनाए रखना कहते हैं। भारत इसका उदाहरण है।
Q. भारत को संघीय देश क्यों कहा जाता है?
Ans. भारत में केंद्र और राज्य सरकारें हैं तथा संविधान में उनके अधिकार निर्धारित हैं। संविधान की सातवीं अनुसूची में संघ सूची, राज्य सूची और समवर्ती सूची के माध्यम से विषयों का बँटवारा किया गया है।
Q. संघ सूची क्या है?
Ans. संघ सूची में राष्ट्रीय महत्व के विषय शामिल होते हैं, जिन पर सामान्यतः केंद्र सरकार कानून बनाती है। रक्षा, विदेश मामले, मुद्रा और बैंकिंग इसके उदाहरण हैं।
Q. राज्य सूची क्या है?
Ans. राज्य सूची में ऐसे विषय शामिल होते हैं जिन पर सामान्य परिस्थितियों में राज्य सरकारें कानून बनाती हैं। पुलिस, लोक व्यवस्था और कृषि इसके प्रमुख उदाहरण हैं।
Q. समवर्ती सूची क्या है?
Ans. समवर्ती सूची में ऐसे विषय शामिल हैं जिन पर केंद्र और राज्य दोनों कानून बना सकते हैं। शिक्षा, वन, विवाह और उत्तराधिकार इसके उदाहरण हैं।
Q. अवशिष्ट विषय किसे कहते हैं?
Ans. वे विषय जिनका उल्लेख संविधान की संघ, राज्य या समवर्ती सूची में नहीं है, अवशिष्ट विषय कहलाते हैं। भारत में सामान्यतः इन विषयों पर कानून बनाने का अधिकार संसद के पास है।
Q. भारत में भाषाई राज्यों का गठन क्यों किया गया?
Ans. भाषाई राज्यों का गठन प्रशासन को सुविधाजनक बनाने, भाषाई पहचान का सम्मान करने और विभिन्न भाषाई समुदायों की आकांक्षाओं को पूरा करने के उद्देश्य से किया गया।
Q. भारत में भाषाई राज्यों के गठन का क्या प्रभाव पड़ा?
Ans. भाषाई राज्यों के गठन से क्षेत्रीय भाषाओं और पहचान को मान्यता मिली। इससे भारतीय संघ की एकता को कमजोर करने के बजाय लोकतांत्रिक भागीदारी और संघीय व्यवस्था को मजबूत करने में सहायता मिली।
Q. भारत की भाषा नीति की प्रमुख विशेषता क्या है?
Ans. भारत ने किसी एक भाषा को पूरे देश की एकमात्र राष्ट्रीय भाषा घोषित नहीं किया है। हिंदी संघ की राजभाषा है और अंग्रेजी का प्रयोग भी आधिकारिक उद्देश्यों के लिए जारी है। संविधान में अनेक अनुसूचित भाषाओं को मान्यता प्राप्त है।
Q. विकेंद्रीकरण क्या है?
Ans. जब केंद्र और राज्य सरकारों से शक्तियाँ आगे स्थानीय सरकारों को दी जाती हैं, ताकि स्थानीय समस्याओं का समाधान स्थानीय स्तर पर हो सके, तो इसे विकेंद्रीकरण कहते हैं।
Q. 73वें और 74वें संविधान संशोधन का क्या महत्व है?
Ans. 73वें संशोधन ने पंचायती राज संस्थाओं और 74वें संशोधन ने नगर निकायों को संवैधानिक आधार दिया। इन संशोधनों ने स्थानीय स्वशासन और लोकतांत्रिक भागीदारी को मजबूत किया।
Q. ग्राम पंचायत और ग्राम सभा में क्या अंतर है?
Ans. ग्राम पंचायत गाँव के स्तर पर चुनी गई स्थानीय शासन संस्था है। ग्राम सभा में उस ग्राम पंचायत क्षेत्र के सभी पंजीकृत मतदाता शामिल होते हैं और वह स्थानीय मामलों पर चर्चा तथा निगरानी कर सकती है।
Q. भारतीय संघवाद की सफलता में किन कारकों ने योगदान दिया?
Ans. संवैधानिक व्यवस्था, भाषाई विविधता का सम्मान, लोकतांत्रिक राजनीति, राज्यों की भूमिका और केंद्र-राज्य सहयोग ने भारतीय संघवाद की सफलता में योगदान दिया है।

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