Q. जल संसाधन क्या हैं?
Ans. पृथ्वी पर उपलब्ध सतही जल, भूमिगत जल, नदियाँ, झीलें, तालाब और अन्य जल स्रोत जल संसाधन कहलाते हैं। इनका उपयोग पेयजल, सिंचाई, उद्योग और बिजली उत्पादन में होता है।
Q. पृथ्वी पर जल की प्रचुरता के बावजूद जल संकट क्यों होता है?
Ans. पृथ्वी पर अधिकांश जल खारा है। मीठे जल का बड़ा भाग हिमनदों और बर्फ में जमा है। इसके अतिरिक्त जल का असमान वितरण, बढ़ती जनसंख्या, प्रदूषण और अत्यधिक दोहन जल संकट उत्पन्न करते हैं।
Q. जल दुर्लभता का क्या अर्थ है?
Ans. जब किसी क्षेत्र में लोगों की आवश्यकताओं के अनुसार पर्याप्त स्वच्छ जल उपलब्ध नहीं होता, तो उस स्थिति को जल दुर्लभता कहते हैं।
Q. जल की माँग बढ़ने के प्रमुख कारण क्या हैं?
Ans. बढ़ती जनसंख्या, शहरीकरण, औद्योगीकरण, कृषि में सिंचाई की बढ़ती आवश्यकता और जीवन स्तर में परिवर्तन जल की माँग बढ़ाते हैं।
Q. भारत में सिंचाई के लिए जल की आवश्यकता क्यों होती है?
Ans. भारत के अनेक क्षेत्रों में वर्षा मौसमी और अनिश्चित होती है। सिंचाई फसलों को आवश्यक समय पर पानी उपलब्ध कराती है और कृषि उत्पादन बढ़ाने में मदद करती है।
Q. बहुउद्देशीय नदी घाटी परियोजना क्या है?
Ans. ऐसी परियोजना जिसमें बाँध और जलाशयों का उपयोग सिंचाई, जलविद्युत उत्पादन, बाढ़ नियंत्रण, पेयजल आपूर्ति और अन्य कार्यों के लिए किया जाता है, बहुउद्देशीय नदी घाटी परियोजना कहलाती है।
Q. बाँध क्या है?
Ans. बाँध नदी या जलधारा पर बनाया गया अवरोध है, जिसके माध्यम से जल को रोका, संग्रहित या नियंत्रित किया जाता है।
Q. बहुउद्देशीय परियोजनाओं के दो लाभ बताइए।
Ans. इनसे सिंचाई के लिए जल उपलब्ध होता है और जलविद्युत का उत्पादन किया जा सकता है। इनके अन्य लाभों में पेयजल आपूर्ति तथा कुछ परिस्थितियों में बाढ़ नियंत्रण शामिल हैं।
Q. बड़े बाँधों से होने वाली दो समस्याएँ बताइए।
Ans. बड़े बाँधों से लोगों का विस्थापन और प्राकृतिक पारिस्थितिक तंत्रों में बदलाव हो सकता है। इनके कारण जंगल और कृषि भूमि जलमग्न हो सकते हैं।
Q. नर्मदा बचाओ आंदोलन किससे संबंधित था?
Ans. नर्मदा बचाओ आंदोलन नर्मदा घाटी में बड़े बाँधों के निर्माण से जुड़े विस्थापन, पुनर्वास और पर्यावरणीय प्रभावों के मुद्दों से संबंधित जन आंदोलन था।
Q. जल संरक्षण क्यों आवश्यक है?
Ans. जल संरक्षण से भविष्य के लिए जल उपलब्धता बनी रहती है, भूजल स्तर को सहारा मिलता है, जल संकट कम होता है और पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने में सहायता मिलती है।
Q. वर्षा जल संचयन क्या है?
Ans. वर्षा जल संचयन वर्षा के पानी को छतों, आँगनों या अन्य सतहों से एकत्र करके टंकियों, जलाशयों अथवा भूजल पुनर्भरण संरचनाओं में संग्रहित करने की प्रक्रिया है।
Q. छत पर वर्षा जल संचयन कैसे किया जाता है?
Ans. छत पर गिरने वाले वर्षा जल को पाइपों और फिल्टर की मदद से टंकी में एकत्र किया जाता है या सोख्ता गड्ढे और पुनर्भरण कुएँ के माध्यम से जमीन में पहुँचाया जाता है।
Q. राजस्थान में वर्षा जल संचयन की पारंपरिक व्यवस्था क्या है?
Ans. राजस्थान के शुष्क क्षेत्रों में टांका जैसी भूमिगत टंकियों में वर्षा जल एकत्र किया जाता रहा है। इससे घरेलू उपयोग के लिए पानी सुरक्षित रखा जाता है।
Q. खादिन प्रणाली क्या है?
Ans. खादिन राजस्थान की एक पारंपरिक जल संरक्षण व्यवस्था है जिसमें ढलान से बहने वाले वर्षा जल को खेत के निचले हिस्से में रोककर मिट्टी में नमी बनाए रखने और कृषि में सहायता ली जाती है।
Q. गुल या कुल क्या हैं?
Ans. गुल या कुल हिमालयी क्षेत्रों में विकसित पारंपरिक जल वितरण नहरें हैं, जिनसे पहाड़ी नदियों या झरनों का पानी कृषि भूमि तक पहुँचाया जाता है।
Q. बाँस ड्रिप सिंचाई प्रणाली कहाँ प्रचलित है?
Ans. बाँस ड्रिप सिंचाई प्रणाली मेघालय में प्रचलित पारंपरिक तकनीक है। इसमें बाँस की नलियों के माध्यम से पानी को पौधों की जड़ों तक पहुँचाया जाता है।
Q. जल प्रदूषण जल संकट को कैसे बढ़ाता है?
Ans. जल प्रदूषण नदियों, झीलों और भूजल को उपयोग के योग्य नहीं रहने देता। इससे स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता घटती है और जल शोधन की आवश्यकता बढ़ती है।
Q. भूजल का अत्यधिक दोहन क्या समस्याएँ पैदा करता है?
Ans. भूजल का अत्यधिक दोहन जल स्तर को नीचे गिरा सकता है, कुओं और नलकूपों को सूखा सकता है तथा कुछ तटीय क्षेत्रों में खारे पानी के प्रवेश का खतरा बढ़ा सकता है।
Q. जल संसाधनों के संरक्षण के पाँच उपाय बताइए।
Ans. वर्षा जल संचयन, जल का विवेकपूर्ण उपयोग, टपक सिंचाई, जल स्रोतों को प्रदूषण से बचाना और तालाबों तथा पारंपरिक जल संरचनाओं का पुनर्जीवन जल संरक्षण के प्रमुख उपाय हैं।