❓ Question Answer

Chapter 7 - वन एवं वन्य जीव संसाधन

Q. वन एवं वन्य जीव संसाधन का क्या अर्थ है?
Ans. वन एवं वन्य जीव संसाधन में जंगलों में पाए जाने वाले पेड़-पौधे, जीव-जंतु और उनसे जुड़े प्राकृतिक पारिस्थितिक तंत्र शामिल होते हैं। ये पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण हैं।
Q. जैव विविधता क्या है?
Ans. जैव विविधता का अर्थ पृथ्वी पर पाए जाने वाले विभिन्न प्रकार के पौधों, पशुओं और सूक्ष्मजीवों तथा उनके पारिस्थितिक तंत्रों की विविधता से है।
Q. वन और वन्य जीवों का संरक्षण क्यों आवश्यक है?
Ans. वन और वन्य जीव जलवायु संतुलन, मिट्टी संरक्षण, जल चक्र, खाद्य शृंखला और जैव विविधता बनाए रखने में सहायता करते हैं। इनका संरक्षण पारिस्थितिक संतुलन के लिए आवश्यक है।
Q. सामान्य प्रजातियाँ किसे कहा जाता है?
Ans. वे प्रजातियाँ जिनकी संख्या जीवित रहने के लिए सामान्य मानी जाती है और जिनके निकट भविष्य में संकटग्रस्त होने की आशंका कम होती है, सामान्य प्रजातियाँ कहलाती हैं।
Q. संकटग्रस्त प्रजातियाँ क्या हैं?
Ans. वे प्रजातियाँ जिनकी संख्या इतनी कम हो गई है कि उनके विलुप्त होने का खतरा है, संकटग्रस्त प्रजातियाँ कहलाती हैं।
Q. सुभेद्य प्रजातियाँ किसे कहते हैं?
Ans. वे प्रजातियाँ जिनकी संख्या घट रही है और जिनके निकट भविष्य में संकटग्रस्त होने की आशंका है, सुभेद्य प्रजातियाँ कहलाती हैं।
Q. दुर्लभ प्रजातियाँ क्या हैं?
Ans. वे प्रजातियाँ जिनकी संख्या बहुत कम है और जो सीमित क्षेत्रों में पाई जाती हैं, दुर्लभ प्रजातियाँ कहलाती हैं।
Q. स्थानिक प्रजातियाँ किसे कहा जाता है?
Ans. वे प्रजातियाँ जो प्राकृतिक रूप से किसी विशेष भौगोलिक क्षेत्र में ही पाई जाती हैं, स्थानिक प्रजातियाँ कहलाती हैं।
Q. विलुप्त प्रजातियाँ क्या हैं?
Ans. वे प्रजातियाँ जिनका कोई जीवित सदस्य अपने प्राकृतिक आवास या ज्ञात क्षेत्र में शेष नहीं रह गया है, विलुप्त प्रजातियाँ कहलाती हैं।
Q. वनों के विनाश के प्रमुख कारण क्या हैं?
Ans. कृषि का विस्तार, खनन, औद्योगीकरण, शहरीकरण, बाँध निर्माण, व्यावसायिक वानिकी और अवैध कटाई वनों के विनाश के प्रमुख कारण हैं।
Q. वन्य जीवों के लिए आवास का विनाश कैसे हानिकारक है?
Ans. आवास के विनाश से वन्य जीवों को भोजन, पानी, आश्रय और प्रजनन के स्थान नहीं मिलते। इससे उनकी संख्या घट सकती है और उनके विलुप्त होने का खतरा बढ़ता है।
Q. भारत में जैव विविधता को खतरा पहुँचाने वाले प्रमुख कारक कौन-से हैं?
Ans. आवास विनाश, शिकार, प्रदूषण, वनों की कटाई, विकास परियोजनाएँ और प्राकृतिक संसाधनों का अत्यधिक दोहन जैव विविधता को खतरा पहुँचाते हैं।
Q. वन्य जीव संरक्षण अधिनियम, 1972 का क्या महत्व है?
Ans. वन्य जीव संरक्षण अधिनियम, 1972 भारत में वन्य जीवों और संबंधित संरक्षित प्रजातियों के संरक्षण के लिए कानूनी ढाँचा प्रदान करता है तथा शिकार और अवैध व्यापार को नियंत्रित करने में सहायता करता है।
Q. राष्ट्रीय उद्यान और वन्य जीव अभयारण्य का क्या उद्देश्य है?
Ans. इनका उद्देश्य वन्य जीवों, प्राकृतिक आवासों और जैव विविधता की रक्षा करना है। राष्ट्रीय उद्यानों में संरक्षण संबंधी नियम सामान्यतः अधिक कठोर होते हैं।
Q. प्रोजेक्ट टाइगर कब शुरू किया गया?
Ans. भारत में बाघों की घटती संख्या को बचाने के लिए प्रोजेक्ट टाइगर 1973 में शुरू किया गया था।
Q. आरक्षित वन क्या होते हैं?
Ans. आरक्षित वन वे वन क्षेत्र हैं जिन्हें कानून के अंतर्गत विशेष संरक्षण प्राप्त होता है और जहाँ गतिविधियाँ निर्धारित नियमों के अनुसार नियंत्रित की जाती हैं।
Q. संरक्षित वन क्या होते हैं?
Ans. संरक्षित वन ऐसे वन क्षेत्र हैं जिन्हें वन संरक्षण के लिए कानूनी सुरक्षा दी जाती है, हालाँकि वहाँ कुछ गतिविधियों की अनुमति निर्धारित नियमों के अधीन हो सकती है।
Q. संयुक्त वन प्रबंधन (JFM) क्या है?
Ans. संयुक्त वन प्रबंधन ऐसी व्यवस्था है जिसमें स्थानीय समुदाय और वन विभाग मिलकर वन संरक्षण, पुनर्स्थापन और प्रबंधन में भाग लेते हैं।
Q. चिपको आंदोलन का वन संरक्षण में क्या योगदान था?
Ans. चिपको आंदोलन में स्थानीय लोगों ने पेड़ों की कटाई रोकने के लिए पेड़ों से चिपककर विरोध किया। इस आंदोलन ने वन संरक्षण और स्थानीय समुदायों के अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ाई।
Q. वन एवं वन्य जीव संरक्षण में स्थानीय समुदायों की क्या भूमिका है?
Ans. स्थानीय समुदाय वृक्षारोपण, अवैध कटाई और शिकार पर निगरानी, पारंपरिक संरक्षण प्रथाओं तथा वन संसाधनों के सतत उपयोग के माध्यम से जैव विविधता की रक्षा कर सकते हैं।

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