Q. औद्योगीकरण का युग किसे कहा जाता है?
Ans. औद्योगीकरण का युग वह काल है जिसमें उत्पादन की प्रक्रिया में मशीनों, कारखानों और आधुनिक तकनीक का उपयोग बढ़ा तथा औद्योगिक उत्पादन का विस्तार हुआ।
Q. प्रोटो-औद्योगीकरण क्या था?
Ans. कारखानों के व्यापक विकास से पहले ग्रामीण क्षेत्रों में व्यापारियों के लिए घरों और छोटी कार्यशालाओं में वस्तुओं का उत्पादन किया जाता था। इस व्यवस्था को प्रोटो-औद्योगीकरण कहा जाता है।
Q. प्रोटो-औद्योगीकरण में व्यापारी ग्रामीण परिवारों से काम क्यों करवाते थे?
Ans. ग्रामीण परिवारों को काम देने से व्यापारियों को सस्ता श्रम मिलता था और वे शहरी उत्पादन संगठनों के कठोर नियंत्रण से बच सकते थे।
Q. इंग्लैंड में कारखानों का विकास कब तेजी से हुआ?
Ans. अठारहवीं सदी के उत्तरार्ध से इंग्लैंड में कारखानों का विकास तेजी से होने लगा। औद्योगिक क्रांति ने उत्पादन की प्रक्रिया में बड़े परिवर्तन किए।
Q. औद्योगिक क्रांति में कपड़ा उद्योग का क्या महत्व था?
Ans. कपड़ा उद्योग औद्योगिक क्रांति के प्रमुख उद्योगों में था। कताई और बुनाई की मशीनों के विकास से कपड़े का उत्पादन बढ़ा और लागत में परिवर्तन आया।
Q. स्पिनिंग जेनी का आविष्कार किसने किया?
Ans. स्पिनिंग जेनी का आविष्कार जेम्स हरग्रीव्स ने 1764 के आसपास किया। इससे एक साथ कई धागे कातना संभव हुआ।
Q. भाप के इंजन के विकास में जेम्स वाट का क्या योगदान था?
Ans. जेम्स वाट ने अठारहवीं सदी में भाप के इंजन में महत्वपूर्ण सुधार किए। इससे उद्योगों और परिवहन में भाप की शक्ति के उपयोग को बढ़ावा मिला।
Q. औद्योगीकरण के बावजूद हाथ से उत्पादन क्यों जारी रहा?
Ans. कई वस्तुओं के लिए विशेष डिजाइन, बारीक कारीगरी और विविधता की आवश्यकता थी। मशीनें हर प्रकार की माँग पूरी नहीं कर सकती थीं, इसलिए हस्तनिर्मित वस्तुओं का उत्पादन जारी रहा।
Q. मशीनों के आने से मजदूरों में भय क्यों पैदा हुआ?
Ans. मजदूरों को डर था कि मशीनें उनका काम छीन लेंगी और उनकी मजदूरी तथा रोजगार के अवसर कम हो जाएंगे।
Q. औद्योगीकरण से पहले भारतीय वस्त्र उद्योग की क्या स्थिति थी?
Ans. भारत अपने सूती और रेशमी वस्त्रों के लिए प्रसिद्ध था। भारतीय कपड़ों की घरेलू और विदेशी बाजारों में माँग थी।
Q. ईस्ट इंडिया कंपनी ने भारतीय बुनकरों पर नियंत्रण कैसे स्थापित किया?
Ans. कंपनी ने गुमाश्तों को नियुक्त किया, बुनकरों को अग्रिम धन दिया और उनसे निर्धारित शर्तों पर कपड़ा तैयार करवाया।
Q. गुमाश्ता कौन होते थे?
Ans. गुमाश्ता ईस्ट इंडिया कंपनी के वे एजेंट होते थे जो बुनकरों की निगरानी करते, कपड़े की आपूर्ति सुनिश्चित करते और कंपनी के लिए व्यापारिक कार्य करते थे।
Q. भारतीय बुनकरों को किन समस्याओं का सामना करना पड़ा?
Ans. बुनकरों को कम कीमत, कंपनी के एजेंटों के दबाव, कच्चे माल की कठिनाइयों और ब्रिटेन में बने मशीन निर्मित कपड़ों से प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ा।
Q. मैनचेस्टर के कपड़ों ने भारतीय बुनकरों को कैसे प्रभावित किया?
Ans. मशीनों से बने सस्ते ब्रिटिश कपड़ों के आयात से भारतीय बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ी और अनेक भारतीय बुनकरों की आय प्रभावित हुई।
Q. भारत में पहली सूती कपड़ा मिल कहाँ स्थापित हुई?
Ans. भारत की पहली सफल सूती कपड़ा मिल 1854 में बंबई में स्थापित हुई।
Q. भारत में जूट उद्योग का प्रारंभिक विकास कहाँ हुआ?
Ans. भारत में जूट उद्योग का प्रारंभिक विकास बंगाल में हुआ। पहली जूट मिल 1855 में रिशरा में स्थापित की गई।
Q. भारतीय उद्योगों में मजदूर कहाँ से आते थे?
Ans. मजदूर प्रायः गाँवों और आसपास के क्षेत्रों से काम की तलाश में औद्योगिक नगरों में आते थे। कई मजदूरों को परिचितों और श्रमिक ठेकेदारों के माध्यम से काम मिलता था।
Q. औद्योगिक उत्पादों के विज्ञापनों का क्या उद्देश्य था?
Ans. विज्ञापनों का उद्देश्य वस्तुओं की पहचान बनाना, ग्राहकों को आकर्षित करना और बाजार में उत्पादों की बिक्री बढ़ाना था।
Q. भारतीय उद्योगपतियों ने स्वदेशी आंदोलन का समर्थन क्यों किया?
Ans. स्वदेशी आंदोलन ने विदेशी वस्तुओं के बहिष्कार और भारतीय वस्तुओं के उपयोग को प्रोत्साहित किया। इससे भारतीय उद्योगपतियों को घरेलू बाजार बढ़ने की आशा हुई।
Q. औद्योगीकरण ने भारतीय अर्थव्यवस्था को किस प्रकार प्रभावित किया?
Ans. औद्योगीकरण से आधुनिक कारखानों, रोजगार और नए औद्योगिक नगरों का विकास हुआ। साथ ही पारंपरिक कारीगरों और बुनकरों को नई प्रतिस्पर्धा तथा आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।