❓ Question Answer

Chapter 5 - भ्रान्तो बालः

Q. भ्रान्तो बालः पाठ का मुख्य पात्र कौन है?
Ans. इस पाठ का मुख्य पात्र एक ऐसा बालक है जिसे पढ़ाई की अपेक्षा खेलना अधिक पसंद है।
Q. बालक खेलने के लिए कब निकला?
Ans. बालक विद्यालय जाने के समय खेलने के लिए निकला।
Q. बालक के मित्र जल्दी में क्यों थे?
Ans. उसके मित्र पिछले दिन के पाठ को याद करके विद्यालय जाने की तैयारी में थे।
Q. बालक कहाँ गया?
Ans. बालक पुष्पोद्यान अर्थात फूलों के बगीचे में गया।
Q. बालक ने बगीचे में किसे देखा?
Ans. बालक ने मधु एकत्र करने में व्यस्त भौंरे को देखा।
Q. भौंरा किस काम में व्यस्त था?
Ans. भौंरा फूलों से मधु एकत्र करने में व्यस्त था।
Q. भौंरे ने बालक के साथ खेलने से क्यों मना किया?
Ans. भौंरा मधु-संग्रह के अपने काम में व्यस्त था, इसलिए उसने खेलने से मना किया।
Q. बालक ने चटक अर्थात चिड़िया को क्या प्रलोभन दिया?
Ans. बालक ने चिड़िया को स्वादिष्ट भोजन देने का प्रलोभन दिया।
Q. चटक अपनी चोंच से क्या उठा रही थी?
Ans. चटक अपनी चोंच से घास और तिनके जैसी वस्तुएँ उठा रही थी।
Q. चटक अपना घोंसला कहाँ बना रही थी?
Ans. चटक वटवृक्ष की शाखा पर अपना घोंसला बना रही थी।
Q. चटक ने बालक के साथ खेलने से क्यों मना किया?
Ans. चटक घोंसला बनाने के काम में व्यस्त थी, इसलिए उसने खेलने से मना किया।
Q. बालक ने किस पशु को खेल के लिए बुलाया?
Ans. बालक ने कुत्ते को अपने साथ खेलने के लिए बुलाया।
Q. कुत्ता किस काम में व्यस्त था?
Ans. कुत्ता अपने स्वामी के घर की रक्षा करने में व्यस्त था।
Q. कुत्ता अपने स्वामी के घर की रक्षा क्यों करता था?
Ans. क्योंकि उसका स्वामी उसका पालन-पोषण पुत्र के समान प्रेम से करता था और कुत्ता अपने स्वामी के प्रति कर्तव्य निभाता था।
Q. बालक को खेल में साथ देने के लिए कौन आया?
Ans. भौंरा, चटक और कुत्ता—इनमें से कोई भी बालक के साथ खेलने नहीं आया।
Q. बालक निराश क्यों हुआ?
Ans. बालक जिनके साथ खेलना चाहता था, वे सभी अपने-अपने कार्य में व्यस्त थे; इसलिए वह निराश हुआ।
Q. बालक को अंत में क्या समझ में आया?
Ans. बालक को समझ में आया कि सभी अपने-अपने कार्य में लगे रहते हैं और उसे भी अपना कर्तव्य निभाना चाहिए।
Q. भ्रान्तो बालः शीर्षक का क्या अर्थ है?
Ans. भ्रान्तो बालः का अर्थ है भ्रमित या भटका हुआ बालक।
Q. इस कहानी में बालक की कौन-सी कमी दिखाई गई है?
Ans. बालक की कमी यह है कि वह पढ़ाई और कर्तव्य की अपेक्षा खेल-कूद को अधिक महत्त्व देता है।
Q. भ्रान्तो बालः पाठ से क्या शिक्षा मिलती है?
Ans. इस पाठ से शिक्षा मिलती है कि हमें आलस्य छोड़कर अपना कर्तव्य समय पर करना चाहिए और समय व्यर्थ नहीं गंवाना चाहिए।

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