❓ Question Answer

Chapter 6 - ऊतक

Q. ऊतक किसे कहते हैं?
Ans. समान उत्पत्ति, समान संरचना और विशेष कार्य करने वाली कोशिकाओं के समूह को ऊतक कहते हैं। बहुकोशिकीय जीवों में ऊतक कार्यों का विभाजन करके शरीर की क्रियाओं को अधिक कुशल बनाते हैं।
Q. बहुकोशिकीय जीवों में ऊतकों का क्या महत्व है?
Ans. ऊतक श्रम-विभाजन में सहायता करते हैं। अलग-अलग ऊतक विशेष कार्य करते हैं, जैसे सुरक्षा, परिवहन, गति और संदेशों का संचार। इससे शरीर की कार्यक्षमता बढ़ती है।
Q. पादप ऊतक कितने मुख्य प्रकार के होते हैं?
Ans. पादप ऊतक मुख्यतः दो प्रकार के होते हैं—विभज्योतक ऊतक और स्थायी ऊतक। विभज्योतक ऊतक कोशिका विभाजन द्वारा वृद्धि करते हैं, जबकि स्थायी ऊतक विशेष कार्य करते हैं।
Q. विभज्योतक ऊतक क्या है?
Ans. ऐसा पादप ऊतक जिसकी कोशिकाएँ लगातार विभाजित होकर नई कोशिकाएँ बनाती हैं, विभज्योतक ऊतक कहलाता है। यह पौधों की वृद्धि के लिए जिम्मेदार होता है।
Q. शीर्षस्थ विभज्योतक कहाँ पाया जाता है और इसका क्या कार्य है?
Ans. शीर्षस्थ विभज्योतक जड़ और तने के शीर्ष पर पाया जाता है। यह पौधे की लंबाई बढ़ाने में सहायता करता है और प्राथमिक वृद्धि के लिए जिम्मेदार होता है।
Q. पार्श्व विभज्योतक का क्या कार्य है?
Ans. पार्श्व विभज्योतक तने और जड़ की मोटाई या परिधि बढ़ाने में सहायता करता है। उदाहरण के लिए, संवहनी कैंबियम और कॉर्क कैंबियम पार्श्व वृद्धि में भूमिका निभाते हैं।
Q. स्थायी ऊतक किसे कहते हैं?
Ans. वे ऊतक जिनकी कोशिकाएँ विभज्योतक से बनकर विभाजन की क्षमता खो देती हैं और विशेष कार्य करने लगती हैं, स्थायी ऊतक कहलाते हैं। इनमें सरल स्थायी तथा जटिल स्थायी ऊतक शामिल हैं।
Q. पैरेन्काइमा ऊतक क्या है?
Ans. पैरेन्काइमा जीवित कोशिकाओं से बना सरल स्थायी ऊतक है। इसकी कोशिकाओं की भित्तियाँ सामान्यतः पतली होती हैं। यह भोजन और जल के भंडारण तथा कुछ पौधों में प्रकाश संश्लेषण में सहायता करता है।
Q. कोलेन्काइमा ऊतक का क्या कार्य है?
Ans. कोलेन्काइमा पौधे के बढ़ते भागों, विशेषकर पत्तियों के डंठल और युवा तनों को लचीलापन तथा यांत्रिक सहारा देता है। इसकी जीवित कोशिकाओं के कोनों पर भित्ति मोटी होती है।
Q. स्क्लेरेन्काइमा ऊतक क्या है?
Ans. स्क्लेरेन्काइमा ऐसा ऊतक है जिसकी परिपक्व कोशिकाएँ सामान्यतः मृत होती हैं और उनकी भित्तियाँ लिग्निन के कारण मोटी तथा कठोर होती हैं। यह पौधे को मजबूती और कठोरता देता है।
Q. जाइलम का क्या कार्य है?
Ans. जाइलम जड़ों से जल और खनिज लवणों का परिवहन पौधे के अन्य भागों तक करता है। यह पौधे को यांत्रिक सहारा भी देता है। इसके प्रमुख घटक ट्रैकिड, वाहिकाएँ, जाइलम पैरेन्काइमा और जाइलम फाइबर हैं।
Q. फ्लोएम का क्या कार्य है?
Ans. फ्लोएम पत्तियों में बने भोजन, मुख्यतः शर्करा, को पौधे के विभिन्न भागों तक पहुँचाता है। इसके प्रमुख घटक चालनी नलिकाएँ, सहचर कोशिकाएँ, फ्लोएम पैरेन्काइमा और फ्लोएम फाइबर हैं।
Q. एपिथीलियल या उपकला ऊतक क्या है?
Ans. उपकला ऊतक शरीर की बाहरी सतह तथा कई आंतरिक अंगों और गुहाओं की सतह को ढकता है। यह सुरक्षा, अवशोषण, स्राव और पदार्थों के आदान-प्रदान जैसे कार्य करता है।
Q. संयोजी ऊतक क्या है? उदाहरण दीजिए।
Ans. संयोजी ऊतक शरीर के विभिन्न भागों को जोड़ने, सहारा देने, सुरक्षा करने या पदार्थों का परिवहन करने में मदद करता है। उदाहरण: रक्त, अस्थि, उपास्थि, वसा ऊतक, कंडरा और स्नायुबंधन।
Q. रक्त को संयोजी ऊतक क्यों कहा जाता है?
Ans. रक्त के तरल मैट्रिक्स प्लाज्मा में रक्त कोशिकाएँ होती हैं। यह ऑक्सीजन, पोषक पदार्थ, हार्मोन और अपशिष्ट पदार्थों का परिवहन करता है तथा शरीर की रक्षा और तापमान नियंत्रण में भी सहायता करता है।
Q. पेशीय ऊतक के मुख्य प्रकार कौन-कौन से हैं?
Ans. पेशीय ऊतक तीन प्रकार के होते हैं—रेखित या कंकाली पेशी, अरेखित या चिकनी पेशी और हृदय पेशी। ये क्रमशः शरीर की स्वैच्छिक गति, आंतरिक अंगों की अनैच्छिक गति और हृदय की धड़कन में भूमिका निभाते हैं।
Q. हृदय पेशी की दो विशेषताएँ लिखिए।
Ans. हृदय पेशी रेखित लेकिन अनैच्छिक होती है। इसकी कोशिकाएँ शाखित होती हैं और यह बिना थके जीवन भर लयबद्ध संकुचन करके रक्त पंप करने में सहायता करती है।
Q. तंत्रिका ऊतक क्या है?
Ans. तंत्रिका ऊतक न्यूरॉन और सहायक कोशिकाओं से बना होता है। यह उद्दीपनों को ग्रहण करता है और विद्युत-रासायनिक संकेतों के माध्यम से शरीर के विभिन्न भागों तक संदेश पहुँचाता है।
Q. तंत्रिका कोशिका (न्यूरॉन) के मुख्य भाग कौन-से हैं?
Ans. न्यूरॉन के मुख्य भाग कोशिका काय, डेंड्राइट और ऐक्सॉन हैं। डेंड्राइट संकेत ग्रहण करते हैं, कोशिका काय में केंद्रक होता है और ऐक्सॉन संकेत को आगे पहुँचाता है।
Q. जाइलम और फ्लोएम में अंतर बताइए।
Ans. जाइलम मुख्यतः जल और खनिज लवणों का परिवहन करता है, जबकि फ्लोएम भोजन का परिवहन करता है। जाइलम के अधिकांश संवाहक घटक परिपक्व अवस्था में मृत होते हैं, जबकि फ्लोएम के प्रमुख संवाहक घटक जीवित होते हैं।

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