Q. परमाणु की संरचना से आप क्या समझते हैं?
Ans. परमाणु मुख्यतः एक छोटे, धनावेशित नाभिक और उसके चारों ओर उपस्थित इलेक्ट्रॉनों से बना होता है। नाभिक में प्रोटॉन और सामान्यतः न्यूट्रॉन होते हैं। परमाणु का अधिकांश भाग रिक्त स्थान होता है।
Q. इलेक्ट्रॉन की खोज किसने की थी?
Ans. इलेक्ट्रॉन की खोज जे. जे. थॉमसन ने 1897 में कैथोड किरणों के प्रयोगों के आधार पर की थी। इलेक्ट्रॉन पर ऋणात्मक विद्युत आवेश होता है।
Q. प्रोटॉन क्या है?
Ans. प्रोटॉन परमाणु के नाभिक में पाया जाने वाला धनावेशित उपपरमाण्विक कण है। इसका आवेश +1 प्राथमिक आवेश के बराबर होता है और इसका द्रव्यमान लगभग 1 u है।
Q. न्यूट्रॉन की खोज किसने की थी?
Ans. जेम्स चैडविक ने 1932 में न्यूट्रॉन की खोज की थी। न्यूट्रॉन पर कोई विद्युत आवेश नहीं होता और इसका द्रव्यमान लगभग 1 u होता है।
Q. थॉमसन का परमाणु मॉडल क्या था?
Ans. थॉमसन के मॉडल के अनुसार परमाणु धनावेशित गोले के समान है, जिसमें ऋणावेशित इलेक्ट्रॉन धँसे रहते हैं। इसे समझाने के लिए किशमिश-पुडिंग मॉडल का उदाहरण दिया जाता है।
Q. रदरफोर्ड ने परमाणु की संरचना का अध्ययन कैसे किया?
Ans. रदरफोर्ड और उनके सहयोगियों ने पतली सोने की पन्नी पर अल्फा कणों की बौछार की। अधिकांश कण सीधे निकल गए, कुछ मुड़े और बहुत कम कण वापस लौटे। इन परिणामों से नाभिक की उपस्थिति का निष्कर्ष निकाला गया।
Q. रदरफोर्ड के परमाणु मॉडल के मुख्य निष्कर्ष क्या थे?
Ans. परमाणु के केंद्र में बहुत छोटा, सघन और धनावेशित नाभिक होता है। परमाणु का अधिकांश भाग रिक्त होता है तथा इलेक्ट्रॉन नाभिक के चारों ओर रहते हैं।
Q. रदरफोर्ड के परमाणु मॉडल की एक प्रमुख सीमा बताइए।
Ans. शास्त्रीय भौतिकी के अनुसार नाभिक के चारों ओर घूमता इलेक्ट्रॉन ऊर्जा विकिरित करके नाभिक में गिर जाना चाहिए। इसलिए यह मॉडल परमाणु की स्थिरता को नहीं समझा सका।
Q. बोहर का परमाणु मॉडल क्या बताता है?
Ans. बोहर के मॉडल के अनुसार इलेक्ट्रॉन नाभिक के चारों ओर कुछ निश्चित ऊर्जा स्तरों या कोशों में रह सकते हैं। इन अनुमत अवस्थाओं में इलेक्ट्रॉन ऊर्जा विकिरित नहीं करते। ऊर्जा का उत्सर्जन या अवशोषण स्तरों के बीच संक्रमण पर होता है।
Q. परमाणु में K, L, M और N कोश क्या हैं?
Ans. ये इलेक्ट्रॉनों के ऊर्जा स्तरों को दर्शाते हैं। K, L, M और N क्रमशः n = 1, 2, 3 और 4 के मुख्य ऊर्जा स्तर हैं। नाभिक से दूरी बढ़ने पर सामान्यतः ऊर्जा स्तर भी बढ़ता है।
Q. इलेक्ट्रॉनों के वितरण का 2n² नियम क्या है?
Ans. किसी कोश में अधिकतम इलेक्ट्रॉनों की संख्या 2n² से व्यक्त की जाती है, जहाँ n कोश की संख्या है। इसलिए K कोश में अधिकतम 2, L में 8, M में 18 और N में 32 इलेक्ट्रॉन हो सकते हैं।
Q. संयोजकता इलेक्ट्रॉन किसे कहते हैं?
Ans. परमाणु के सबसे बाहरी ऊर्जा कोश में उपस्थित इलेक्ट्रॉनों को संयोजकता इलेक्ट्रॉन कहते हैं। ये परमाणु के रासायनिक व्यवहार और बंध बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
Q. संयोजकता (Valency) क्या है?
Ans. संयोजकता किसी परमाणु की अन्य परमाणुओं के साथ संयोजन करने की क्षमता है। सरल विद्यालयी मॉडल में यह स्थिर बाहरी कोश प्राप्त करने के लिए इलेक्ट्रॉनों के खोने, पाने या साझा करने से संबंधित होती है।
Q. परमाणु क्रमांक क्या है?
Ans. किसी परमाणु के नाभिक में उपस्थित प्रोटॉनों की संख्या उसका परमाणु क्रमांक कहलाती है। उदासीन परमाणु में इलेक्ट्रॉनों की संख्या भी प्रोटॉनों के बराबर होती है।
Q. द्रव्यमान संख्या क्या है?
Ans. किसी परमाणु के नाभिक में उपस्थित प्रोटॉनों और न्यूट्रॉनों की कुल संख्या उसकी द्रव्यमान संख्या कहलाती है। द्रव्यमान संख्या = प्रोटॉनों की संख्या + न्यूट्रॉनों की संख्या।
Q. उदासीन परमाणु में प्रोटॉन और इलेक्ट्रॉन की संख्या का क्या संबंध है?
Ans. उदासीन परमाणु में प्रोटॉनों की संख्या इलेक्ट्रॉनों की संख्या के बराबर होती है। धनावेश और ऋणावेश एक-दूसरे को संतुलित करते हैं, इसलिए कुल आवेश शून्य होता है।
Q. समस्थानिक (Isotopes) क्या हैं? उदाहरण दीजिए।
Ans. एक ही तत्व के ऐसे परमाणु जिनका परमाणु क्रमांक समान लेकिन द्रव्यमान संख्या अलग होती है, समस्थानिक कहलाते हैं। उदाहरण: कार्बन-12 और कार्बन-14।
Q. समभारिक (Isobars) क्या हैं? उदाहरण दीजिए।
Ans. अलग-अलग तत्वों के ऐसे परमाणु जिनकी द्रव्यमान संख्या समान लेकिन परमाणु क्रमांक अलग होते हैं, समभारिक कहलाते हैं। उदाहरण: आर्गन-40 और कैल्शियम-40।
Q. सोडियम-23 में प्रोटॉन, इलेक्ट्रॉन और न्यूट्रॉन कितने होते हैं?
Ans. सोडियम का परमाणु क्रमांक 11 और द्रव्यमान संख्या 23 है। इसलिए उदासीन सोडियम-23 परमाणु में 11 प्रोटॉन, 11 इलेक्ट्रॉन और 23 − 11 = 12 न्यूट्रॉन होते हैं।
Q. समस्थानिकों के दो उपयोग लिखिए।
Ans. कोबाल्ट-60 का उपयोग कुछ कैंसर उपचारों में विकिरण स्रोत के रूप में किया जाता है। आयोडीन-131 का उपयोग कुछ थायरॉइड रोगों के निदान और उपचार में किया जाता है। इनका प्रयोग विशेषज्ञों की देखरेख में होता है।