Q. हिमालय से निकलने वाली नदियों और प्रायद्वीपीय नदियों में मुख्य अंतर क्या है?
Ans. हिमालयी नदियाँ सामान्यतः हिमनदों, वर्षा और बर्फ के पिघलने से जल प्राप्त करती हैं, इसलिए कई नदियों में वर्षभर पानी रहता है। प्रायद्वीपीय नदियाँ मुख्यतः वर्षा पर निर्भर होती हैं और उनका प्रवाह मौसमी हो सकता है। दोनों प्रणालियाँ सिंचाई, पेयजल और जलविद्युत के लिए महत्वपूर्ण हैं।
Q. गंगा नदी का उद्गम कहाँ होता है और इसकी प्रमुख सहायक नदियाँ कौन-सी हैं?
Ans. गंगा की मुख्य धारा भागीरथी उत्तराखंड के गंगोत्री हिमनद के निकट गौमुख से निकलती है। देवप्रयाग में भागीरथी और अलकनंदा के संगम के बाद नदी को गंगा कहा जाता है। यमुना, घाघरा, गंडक, कोसी और सोन इसकी प्रमुख सहायक नदियों में शामिल हैं।
Q. ब्रह्मपुत्र नदी भारत में किस नाम से प्रवेश करती है और इसकी क्या विशेषता है?
Ans. ब्रह्मपुत्र तिब्बत में यारलुंग त्सांगपो नाम से बहती है। अरुणाचल प्रदेश में प्रवेश करने पर इसे सियांग या दिहांग कहा जाता है और आगे असम में यह ब्रह्मपुत्र कहलाती है। यह विशाल जलग्रहण क्षेत्र, बाढ़ और नदी द्वारा निर्मित द्वीपों के लिए प्रसिद्ध है।
Q. सिंधु नदी प्रणाली का दक्षिण एशिया के लिए क्या महत्व है?
Ans. सिंधु नदी तिब्बत क्षेत्र के निकट से निकलती है और लद्दाख से होकर पाकिस्तान में बहती है। झेलम, चिनाब, रावी, ब्यास और सतलुज इसकी प्रमुख सहायक नदियाँ हैं। यह सिंचाई, कृषि और जल संसाधनों के लिए महत्वपूर्ण नदी प्रणाली है।
Q. नर्मदा और ताप्ती नदियों की प्रवाह दिशा तथा घाटियों की विशेषता क्या है?
Ans. नर्मदा और ताप्ती दोनों प्रमुख प्रायद्वीपीय नदियाँ हैं जो सामान्यतः पश्चिम की ओर बहकर अरब सागर में गिरती हैं। नर्मदा विंध्य और सतपुड़ा पर्वतीय क्षेत्रों के बीच भ्रंश घाटी से बहती है। ताप्ती भी पश्चिममुखी प्रवाह और घाटी के लिए जानी जाती है।
Q. गोदावरी को दक्षिण भारत की गंगा क्यों कहा जाता है?
Ans. गोदावरी प्रायद्वीपीय भारत की सबसे लंबी नदियों में से एक है। इसका उद्गम महाराष्ट्र के त्र्यंबकेश्वर के निकट होता है और यह पूर्व की ओर बहकर बंगाल की खाड़ी में गिरती है। इसका विशाल जलग्रहण क्षेत्र कृषि, सिंचाई और पेयजल के लिए महत्वपूर्ण है।
Q. कावेरी नदी किन राज्यों के लिए महत्वपूर्ण है?
Ans. कावेरी का उद्गम कर्नाटक के पश्चिमी घाट में तलकावेरी के निकट होता है। यह कर्नाटक और तमिलनाडु के लिए सिंचाई तथा पेयजल का महत्वपूर्ण स्रोत है और अंत में बंगाल की खाड़ी में गिरती है। इसके जल के बँटवारे का विषय अंतरराज्यीय जल प्रबंधन में महत्वपूर्ण रहा है।
Q. पश्चिमी घाट और पूर्वी घाट में क्या अंतर है?
Ans. पश्चिमी घाट पश्चिमी तट के समानांतर अधिक सतत पर्वत शृंखला है और कई स्थानों पर अधिक ऊँची है। पूर्वी घाट अपेक्षाकृत असतत है, क्योंकि महानदी, गोदावरी, कृष्णा और कावेरी जैसी नदियाँ इसे काटती हुई बहती हैं। दोनों जैव विविधता और जलवायु के लिए महत्वपूर्ण हैं।
Q. भारत की सबसे ऊँची पर्वत चोटी कौन-सी है और यह कहाँ स्थित है?
Ans. कंचनजंघा भारत की सबसे ऊँची पर्वत चोटी है। यह सिक्किम और नेपाल की सीमा पर स्थित है। विश्व की सबसे ऊँची चोटी माउंट एवरेस्ट है, जो नेपाल और चीन के तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र की सीमा पर स्थित है।
Q. हिमालय को नवीन वलित पर्वत क्यों कहा जाता है?
Ans. हिमालय का निर्माण भारतीय प्लेट और यूरेशियाई प्लेट के टकराव से हुआ। इस टकराव के कारण चट्टानों में वलन और उत्थान हुआ। हिमालय भूवैज्ञानिक दृष्टि से युवा पर्वत प्रणाली है और यहाँ आज भी भूकंपीय गतिविधियाँ तथा भू-आकृतिक परिवर्तन होते रहते हैं।
Q. अरावली पर्वतमाला का भौगोलिक महत्व क्या है?
Ans. अरावली विश्व की प्राचीन पर्वत प्रणालियों में से एक है। यह मुख्यतः राजस्थान से होकर दिल्ली क्षेत्र की दिशा में फैली है। यह स्थानीय जलवायु, वनस्पति, खनिज संसाधनों और मरुस्थलीकरण के अध्ययन में महत्वपूर्ण है।
Q. सतपुड़ा और विंध्य पर्वत भारत के भौतिक भूगोल में क्या भूमिका निभाते हैं?
Ans. विंध्य और सतपुड़ा मध्य भारत की प्रमुख पर्वत प्रणालियाँ हैं। इनके बीच नर्मदा घाटी स्थित है। ये स्थलाकृति, नदी प्रवाह, वन क्षेत्रों और स्थानीय जैव विविधता को प्रभावित करती हैं।
Q. विश्व की सबसे ऊँची पर्वत चोटी कौन-सी है और उसकी ऊँचाई कितनी है?
Ans. माउंट एवरेस्ट विश्व की सबसे ऊँची पर्वत चोटी है। नेपाल और चीन द्वारा स्वीकृत इसकी ऊँचाई 8,848.86 मीटर है। यह हिमालय की महालंगूर हिमाल श्रेणी में स्थित है।
Q. तिब्बती पठार को विश्व की छत क्यों कहा जाता है?
Ans. तिब्बती पठार की औसत ऊँचाई बहुत अधिक है और इसके विस्तृत भाग समुद्र तल से लगभग 4,000 मीटर या उससे अधिक ऊँचे हैं। इसी कारण इसे प्रायः विश्व की छत कहा जाता है। यह एशिया की कई प्रमुख नदी प्रणालियों के जल स्रोतों से भी जुड़ा है।
Q. वुलर झील और डल झील में क्या अंतर है?
Ans. वुलर झील जम्मू-कश्मीर में स्थित एक बड़ी मीठे पानी की झील है और झेलम नदी प्रणाली से जुड़ी है। डल झील श्रीनगर में स्थित है और पर्यटन, स्थानीय आजीविका तथा जल पारिस्थितिकी के लिए प्रसिद्ध है। दोनों का पर्यावरणीय संरक्षण महत्वपूर्ण है।
Q. चिलिका झील की प्रमुख विशेषता क्या है?
Ans. चिलिका झील ओडिशा में बंगाल की खाड़ी के तट पर स्थित एक खारे और मीठे पानी के मिश्रण वाली लैगून है। यह प्रवासी पक्षियों, मछली पालन और जैव विविधता के लिए महत्वपूर्ण है तथा रामसर आर्द्रभूमि के रूप में मान्यता प्राप्त है।
Q. लोकटक झील किस प्राकृतिक विशेषता के लिए प्रसिद्ध है?
Ans. लोकटक झील मणिपुर में स्थित है और तैरते हुए वनस्पति द्वीपों, जिन्हें फुमदी कहा जाता है, के लिए प्रसिद्ध है। इसके भीतर केइबुल लामजाओ राष्ट्रीय उद्यान स्थित है, जो संगाई हिरण के संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण है।
Q. सांभर झील और वुलर झील में क्या प्रमुख अंतर है?
Ans. सांभर झील राजस्थान में स्थित भारत की सबसे बड़ी अंतर्देशीय खारे पानी की झील है और नमक उत्पादन के लिए महत्वपूर्ण है। वुलर झील जम्मू-कश्मीर में स्थित मीठे पानी की झील है और झेलम नदी प्रणाली से जुड़ी है।
Q. झीलें बाढ़ नियंत्रण और भूजल पुनर्भरण में कैसे सहायता करती हैं?
Ans. झीलें और आर्द्रभूमियाँ अतिरिक्त वर्षाजल को अस्थायी रूप से संचित कर सकती हैं, जिससे कुछ क्षेत्रों में बाढ़ का प्रभाव घटता है। वे जल को भूमि में रिसने देने, स्थानीय जलवायु को संतुलित रखने और अनेक जीवों को आवास देने में भी मदद कर सकती हैं। यह लाभ झील की स्थिति और प्रबंधन पर निर्भर करता है।
Q. नदियों और झीलों के प्रदूषण को कम करने के लिए कौन-से उपाय आवश्यक हैं?
Ans. सीवेज का उपचार, औद्योगिक अपशिष्ट पर नियंत्रण, प्लास्टिक और ठोस कचरे का उचित निपटान, नदी तटों पर हरित क्षेत्र, जलग्रहण क्षेत्र का संरक्षण और नियमित जल गुणवत्ता निगरानी आवश्यक हैं। स्थानीय समुदायों की भागीदारी तथा कानूनों का प्रभावी पालन भी जल स्रोतों के संरक्षण में महत्वपूर्ण है।