Q. आदिवासी किसे कहा जाता है?
Ans. आदिवासी उन समुदायों को कहा जाता है जिनकी अपनी विशिष्ट संस्कृति, परंपराएँ, सामाजिक व्यवस्था और जीवनशैली होती है।
Q. दीकू शब्द का क्या अर्थ है?
Ans. दीकू शब्द का प्रयोग बाहरी लोगों के लिए किया जाता था, जैसे साहूकार, व्यापारी, जमींदार और अन्य शोषण करने वाले लोग।
Q. बिरसा मुंडा कौन थे?
Ans. बिरसा मुंडा मुंडा आदिवासी समुदाय के एक प्रमुख नेता और समाज सुधारक थे, जिन्होंने ब्रिटिश शासन तथा आदिवासियों के शोषण के विरुद्ध आंदोलन किया।
Q. बिरसा मुंडा का जन्म कब हुआ था?
Ans. बिरसा मुंडा का जन्म 1875 में हुआ था।
Q. बिरसा मुंडा का जन्म कहाँ हुआ था?
Ans. बिरसा मुंडा का जन्म वर्तमान झारखंड के उलिहातू गाँव में हुआ था।
Q. झूम खेती क्या है?
Ans. झूम खेती एक प्रकार की स्थानांतरित कृषि है, जिसमें जंगल के एक हिस्से को साफ करके कुछ समय तक खेती की जाती है और बाद में दूसरे स्थान पर खेती की जाती है।
Q. आदिवासी समुदाय जंगलों पर क्यों निर्भर थे?
Ans. आदिवासी समुदाय भोजन, ईंधन, औषधियों, लकड़ी, पशुओं के चारे और आजीविका के लिए जंगलों पर निर्भर थे।
Q. ब्रिटिश वन कानूनों का आदिवासियों पर क्या प्रभाव पड़ा?
Ans. वन कानूनों से आदिवासियों के जंगलों में प्रवेश, शिकार, झूम खेती और वन संसाधनों के उपयोग पर प्रतिबंध लगे।
Q. ब्रिटिश सरकार झूम खेती को क्यों रोकना चाहती थी?
Ans. ब्रिटिश अधिकारियों का मानना था कि झूम खेती से जंगलों का प्रबंधन कठिन होता है और सरकार के लिए स्थायी कृषि से राजस्व वसूलना आसान था।
Q. आदिवासी समुदाय स्थायी खेती की ओर क्यों धकेले गए?
Ans. ब्रिटिश शासन जंगलों पर नियंत्रण बढ़ाना और नियमित भूमि-राजस्व प्राप्त करना चाहता था, इसलिए कई आदिवासी समुदायों को स्थायी खेती की ओर धकेला गया।
Q. आदिवासी मुखियाओं की स्थिति में क्या परिवर्तन आया?
Ans. ब्रिटिश शासन में आदिवासी मुखियाओं की स्वतंत्रता कम हो गई और उन्हें औपनिवेशिक अधिकारियों के नियमों तथा करों का पालन करना पड़ा।
Q. आदिवासी लोग साहूकारों से परेशान क्यों थे?
Ans. साहूकार ऊँचे ब्याज पर कर्ज देते थे और कई बार कर्ज न चुका पाने पर आदिवासियों की जमीन तथा संपत्ति पर कब्जा कर लेते थे।
Q. बिरसा मुंडा ने आदिवासियों को क्या संदेश दिया?
Ans. बिरसा मुंडा ने आदिवासियों को एकजुट होने, सामाजिक सुधार करने और अपने अधिकारों तथा जमीन की रक्षा के लिए संघर्ष करने का संदेश दिया।
Q. बिरसा आंदोलन का मुख्य उद्देश्य क्या था?
Ans. बिरसा आंदोलन का मुख्य उद्देश्य आदिवासियों को शोषण से मुक्त कराना, उनकी जमीन और अधिकारों की रक्षा करना तथा मुंडा राज की स्थापना का सपना पूरा करना था।
Q. बिरसा मुंडा ने किस प्रकार के समाज की कल्पना की?
Ans. बिरसा मुंडा ऐसे समाज की कल्पना करते थे जिसमें आदिवासी अपनी जमीन पर अधिकार रखें, बाहरी शोषण से मुक्त हों और अपनी परंपराओं के अनुसार जीवन जी सकें।
Q. बिरसा ने स्वर्ण युग की कल्पना क्यों की?
Ans. बिरसा ने ऐसे पुराने आदर्श समय की कल्पना की जिसमें मुंडा समुदाय स्वतंत्र था, अपनी जमीन पर अधिकार रखता था और बाहरी शोषण से मुक्त था।
Q. औपनिवेशिक शासन में आदिवासियों की जमीन क्यों छिनने लगी?
Ans. जमींदारों, साहूकारों, व्यापारियों और औपनिवेशिक नीतियों के कारण अनेक आदिवासी अपनी पारंपरिक जमीनों से वंचित होने लगे।
Q. आदिवासी समुदायों के जीवन में ठेकेदारों की क्या भूमिका थी?
Ans. ठेकेदार जंगलों से लकड़ी और अन्य संसाधन निकलवाते थे तथा कई बार आदिवासियों से कम मजदूरी पर काम करवाते थे।
Q. बिरसा मुंडा की मृत्यु कब हुई?
Ans. बिरसा मुंडा की मृत्यु 9 जून 1900 को राँची जेल में हुई थी।
Q. बिरसा मुंडा आंदोलन का ऐतिहासिक महत्व क्या है?
Ans. इस आंदोलन ने आदिवासी अधिकारों, जमीन की रक्षा और औपनिवेशिक शोषण के विरुद्ध संघर्ष को मजबूत किया।