❓ Question Answer

Chapter 2 - इतिहास : नए राजा और उनके राज्य

Q. सामंत किसे कहा जाता था?
Ans. सामंत शक्तिशाली अधीनस्थ शासक या सरदार होते थे, जो बड़े राजा की अधीनता स्वीकार करते थे। वे राजा को उपहार देते, दरबार में उपस्थित होते और आवश्यकता पड़ने पर सैनिक सहायता प्रदान करते थे।
Q. नए राजाओं और राज्यों का उदय कैसे हुआ?
Ans. सातवीं शताब्दी के बाद कई क्षेत्रों में शक्तिशाली सरदारों और सामंतों ने अपनी शक्ति बढ़ाई। कुछ ने स्वतंत्रता प्राप्त करके नए राजवंशों और राज्यों की स्थापना की।
Q. प्रशस्ति क्या होती है?
Ans. प्रशस्ति एक ऐसा लेख होता है जिसमें किसी राजा की उपलब्धियों, वीरता, गुणों और विजयों की प्रशंसा की जाती है।
Q. प्रशस्तियों से इतिहासकारों को क्या जानकारी मिलती है?
Ans. प्रशस्तियों से राजाओं की उपलब्धियों, युद्धों, वंशावली और राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं की जानकारी मिलती है। इनमें प्रशंसा के कारण अतिशयोक्ति भी हो सकती है।
Q. भूमि अनुदान क्या था?
Ans. राजा द्वारा ब्राह्मणों, धार्मिक संस्थाओं या अन्य व्यक्तियों को भूमि अथवा उससे प्राप्त होने वाले राजस्व का अधिकार देना भूमि अनुदान कहलाता था।
Q. कल्हण कौन थे?
Ans. कल्हण बारहवीं शताब्दी के कश्मीरी इतिहासकार थे। उन्होंने संस्कृत में राजतरंगिणी की रचना की, जिसमें कश्मीर के राजाओं का इतिहास वर्णित है।
Q. त्रिपक्षीय संघर्ष किसे कहते हैं?
Ans. कन्नौज पर नियंत्रण प्राप्त करने के लिए गुर्जर-प्रतिहारों, पालों और राष्ट्रकूटों के बीच हुए लंबे संघर्ष को त्रिपक्षीय संघर्ष कहा जाता है।
Q. कन्नौज पर अधिकार करना महत्वपूर्ण क्यों था?
Ans. कन्नौज उत्तर भारत का एक महत्वपूर्ण राजनीतिक केंद्र था। उस पर अधिकार से प्रतिष्ठा, राजनीतिक प्रभाव और क्षेत्रीय नियंत्रण बढ़ सकता था।
Q. पाल वंश का शासन मुख्यतः किस क्षेत्र में था?
Ans. पाल वंश का शासन मुख्यतः बंगाल और बिहार के क्षेत्रों में था।
Q. गुर्जर-प्रतिहारों का प्रमुख प्रभाव किस क्षेत्र में था?
Ans. गुर्जर-प्रतिहारों का प्रमुख प्रभाव पश्चिमी और उत्तरी भारत के अनेक क्षेत्रों में था।
Q. राष्ट्रकूट वंश का प्रमुख क्षेत्र कौन-सा था?
Ans. राष्ट्रकूट वंश का प्रमुख प्रभाव दक्कन क्षेत्र में था। उन्होंने उत्तर भारत की राजनीति में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
Q. चोल वंश का उदय कहाँ हुआ?
Ans. चोल वंश का शक्तिशाली राज्य दक्षिण भारत के कावेरी नदी के क्षेत्र में विकसित हुआ।
Q. राजराज प्रथम कौन थे?
Ans. राजराज प्रथम चोल वंश के एक शक्तिशाली राजा थे। उन्होंने चोल साम्राज्य का विस्तार किया और तंजावुर में बृहदेश्वर मंदिर का निर्माण करवाया।
Q. राजेंद्र प्रथम की एक प्रमुख उपलब्धि क्या थी?
Ans. राजेंद्र प्रथम ने चोल साम्राज्य का विस्तार किया और गंगा क्षेत्र तक अभियान चलाया। उन्होंने गंगैकोंडचोलपुरम नामक नगर की स्थापना की।
Q. चोल शासन में मंदिरों का क्या महत्व था?
Ans. मंदिर धार्मिक गतिविधियों के साथ-साथ भूमि, दान, शिल्प, व्यापार और स्थानीय अर्थव्यवस्था के महत्वपूर्ण केंद्र भी थे।
Q. चोल प्रशासन में उर क्या था?
Ans. उर सामान्यतः एक गाँव की सभा या स्थानीय संस्था थी, जिसमें गाँव के निवासी प्रशासन और स्थानीय मामलों पर विचार करते थे।
Q. सभा किसे कहा जाता था?
Ans. चोल काल में सभा ब्राह्मणों को दिए गए ब्रह्मदेय गाँवों की सभा थी, जो स्थानीय प्रशासन और विभिन्न कार्यों का प्रबंधन करती थी।
Q. नगरम क्या था?
Ans. नगरम व्यापारियों और व्यापारिक गतिविधियों से जुड़ी संस्था थी, जो नगरों के आर्थिक जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती थी।
Q. चोल काल में सिंचाई के लिए क्या उपाय किए गए?
Ans. चोल शासकों और स्थानीय समुदायों ने जलाशयों, तालाबों, नहरों और बाँधों जैसी व्यवस्थाओं के माध्यम से सिंचाई को बढ़ावा दिया।
Q. इतिहास के अध्ययन में शिलालेखों का क्या महत्व है?
Ans. शिलालेखों से राजाओं, भूमि अनुदानों, करों, प्रशासन, मंदिरों और स्थानीय संस्थाओं के बारे में ऐतिहासिक जानकारी प्राप्त होती है।
Q. सामंत किसे कहा जाता था?
Ans. सामंत शक्तिशाली अधीनस्थ शासक या सरदार होते थे, जो बड़े राजा की अधीनता स्वीकार करते थे। वे राजा को उपहार देते, दरबार में उपस्थित होते और आवश्यकता पड़ने पर सैनिक सहायता प्रदान करते थे।
Q. नए राजाओं और राज्यों का उदय कैसे हुआ?
Ans. सातवीं शताब्दी के बाद कई क्षेत्रों में शक्तिशाली सरदारों और सामंतों ने अपनी शक्ति बढ़ाई। कुछ ने स्वतंत्रता प्राप्त करके नए राजवंशों और राज्यों की स्थापना की।
Q. प्रशस्ति क्या होती है?
Ans. प्रशस्ति एक ऐसा लेख होता है जिसमें किसी राजा की उपलब्धियों, वीरता, गुणों और विजयों की प्रशंसा की जाती है।
Q. प्रशस्तियों से इतिहासकारों को क्या जानकारी मिलती है?
Ans. प्रशस्तियों से राजाओं की उपलब्धियों, युद्धों, वंशावली और राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं की जानकारी मिलती है। इनमें प्रशंसा के कारण अतिशयोक्ति भी हो सकती है।
Q. भूमि अनुदान क्या था?
Ans. राजा द्वारा ब्राह्मणों, धार्मिक संस्थाओं या अन्य व्यक्तियों को भूमि अथवा उससे प्राप्त होने वाले राजस्व का अधिकार देना भूमि अनुदान कहलाता था।
Q. कल्हण कौन थे?
Ans. कल्हण बारहवीं शताब्दी के कश्मीरी इतिहासकार थे। उन्होंने संस्कृत में राजतरंगिणी की रचना की, जिसमें कश्मीर के राजाओं का इतिहास वर्णित है।
Q. त्रिपक्षीय संघर्ष किसे कहते हैं?
Ans. कन्नौज पर नियंत्रण प्राप्त करने के लिए गुर्जर-प्रतिहारों, पालों और राष्ट्रकूटों के बीच हुए लंबे संघर्ष को त्रिपक्षीय संघर्ष कहा जाता है।
Q. कन्नौज पर अधिकार करना महत्वपूर्ण क्यों था?
Ans. कन्नौज उत्तर भारत का एक महत्वपूर्ण राजनीतिक केंद्र था। उस पर अधिकार से प्रतिष्ठा, राजनीतिक प्रभाव और क्षेत्रीय नियंत्रण बढ़ सकता था।
Q. पाल वंश का शासन मुख्यतः किस क्षेत्र में था?
Ans. पाल वंश का शासन मुख्यतः बंगाल और बिहार के क्षेत्रों में था।
Q. गुर्जर-प्रतिहारों का प्रमुख प्रभाव किस क्षेत्र में था?
Ans. गुर्जर-प्रतिहारों का प्रमुख प्रभाव पश्चिमी और उत्तरी भारत के अनेक क्षेत्रों में था।
Q. राष्ट्रकूट वंश का प्रमुख क्षेत्र कौन-सा था?
Ans. राष्ट्रकूट वंश का प्रमुख प्रभाव दक्कन क्षेत्र में था। उन्होंने उत्तर भारत की राजनीति में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
Q. चोल वंश का उदय कहाँ हुआ?
Ans. चोल वंश का शक्तिशाली राज्य दक्षिण भारत के कावेरी नदी के क्षेत्र में विकसित हुआ।
Q. राजराज प्रथम कौन थे?
Ans. राजराज प्रथम चोल वंश के एक शक्तिशाली राजा थे। उन्होंने चोल साम्राज्य का विस्तार किया और तंजावुर में बृहदेश्वर मंदिर का निर्माण करवाया।
Q. राजेंद्र प्रथम की एक प्रमुख उपलब्धि क्या थी?
Ans. राजेंद्र प्रथम ने चोल साम्राज्य का विस्तार किया और गंगा क्षेत्र तक अभियान चलाया। उन्होंने गंगैकोंडचोलपुरम नामक नगर की स्थापना की।
Q. चोल शासन में मंदिरों का क्या महत्व था?
Ans. मंदिर धार्मिक गतिविधियों के साथ-साथ भूमि, दान, शिल्प, व्यापार और स्थानीय अर्थव्यवस्था के महत्वपूर्ण केंद्र भी थे।
Q. चोल प्रशासन में उर क्या था?
Ans. उर सामान्यतः एक गाँव की सभा या स्थानीय संस्था थी, जिसमें गाँव के निवासी प्रशासन और स्थानीय मामलों पर विचार करते थे।
Q. सभा किसे कहा जाता था?
Ans. चोल काल में सभा ब्राह्मणों को दिए गए ब्रह्मदेय गाँवों की सभा थी, जो स्थानीय प्रशासन और विभिन्न कार्यों का प्रबंधन करती थी।
Q. नगरम क्या था?
Ans. नगरम व्यापारियों और व्यापारिक गतिविधियों से जुड़ी संस्था थी, जो नगरों के आर्थिक जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती थी।
Q. चोल काल में सिंचाई के लिए क्या उपाय किए गए?
Ans. चोल शासकों और स्थानीय समुदायों ने जलाशयों, तालाबों, नहरों और बाँधों जैसी व्यवस्थाओं के माध्यम से सिंचाई को बढ़ावा दिया।
Q. इतिहास के अध्ययन में शिलालेखों का क्या महत्व है?
Ans. शिलालेखों से राजाओं, भूमि अनुदानों, करों, प्रशासन, मंदिरों और स्थानीय संस्थाओं के बारे में ऐतिहासिक जानकारी प्राप्त होती है।

🚀 Quick Access