Q. अपशिष्ट जल किसे कहते हैं?
Ans. घरों, विद्यालयों, अस्पतालों और उद्योगों से उपयोग के बाद निकलने वाला दूषित जल अपशिष्ट जल कहलाता है।
Q. सीवेज क्या है?
Ans. घरों, कार्यालयों और अन्य स्थानों से निकलने वाला मल-मूत्र, साबुन, तेल, भोजन के अवशेष तथा अन्य अशुद्धियों से मिला अपशिष्ट जल सीवेज कहलाता है।
Q. अपशिष्ट जल का उपचार क्यों आवश्यक है?
Ans. अपशिष्ट जल के उपचार से हानिकारक पदार्थों और रोग पैदा करने वाले सूक्ष्मजीवों को हटाने या कम करने में मदद मिलती है। इससे जल प्रदूषण और बीमारियों का खतरा घटता है।
Q. सीवेज उपचार संयंत्र क्या है?
Ans. सीवेज उपचार संयंत्र वह स्थान है जहाँ अपशिष्ट जल को विभिन्न भौतिक, जैविक और अन्य प्रक्रियाओं से साफ किया जाता है।
Q. सीवेज उपचार के प्रारंभिक चरण में बड़े कचरे को कैसे हटाया जाता है?
Ans. छड़दार जालियों या स्क्रीन की सहायता से कपड़े, प्लास्टिक, लकड़ी और अन्य बड़े ठोस पदार्थों को हटाया जाता है।
Q. अपशिष्ट जल में उपस्थित रेत और छोटे कंकड़ कैसे हटाए जाते हैं?
Ans. अपशिष्ट जल को ग्रिट और रेत हटाने वाले कक्ष से गुजारा जाता है, जहाँ भारी रेत और कंकड़ नीचे बैठ जाते हैं।
Q. अवसादन क्या है?
Ans. जब पानी में मौजूद भारी निलंबित ठोस पदार्थ गुरुत्वाकर्षण के कारण नीचे बैठ जाते हैं, तो इस प्रक्रिया को अवसादन कहते हैं।
Q. स्कम क्या होता है?
Ans. सीवेज के पानी की सतह पर तैरने वाली तेल, चिकनाई और हल्की अशुद्धियों की परत को स्कम कहते हैं।
Q. वातन (एरेशन) का क्या उद्देश्य है?
Ans. वातन के दौरान पानी में हवा या ऑक्सीजन पहुँचाई जाती है, जिससे वायवीय सूक्ष्मजीव कार्बनिक अशुद्धियों को तोड़ने में सहायता करते हैं।
Q. अपशिष्ट जल के उपचार में सूक्ष्मजीवों की क्या भूमिका है?
Ans. सूक्ष्मजीव जैविक अशुद्धियों का अपघटन करते हैं और पानी में मौजूद कार्बनिक पदार्थों की मात्रा कम करने में मदद करते हैं।
Q. कीचड़ या स्लज क्या है?
Ans. सीवेज उपचार के दौरान नीचे बैठने वाले ठोस पदार्थों और जैविक अवशेषों को स्लज या कीचड़ कहा जाता है।
Q. अवायवीय जीवाणु क्या करते हैं?
Ans. अवायवीय जीवाणु ऑक्सीजन की अनुपस्थिति में जैविक पदार्थों का अपघटन करते हैं। स्लज के उपचार में इनसे बायोगैस भी बन सकती है।
Q. बायोगैस क्या है?
Ans. जैविक पदार्थों के अवायवीय अपघटन से बनने वाली गैस को बायोगैस कहते हैं। इसमें मुख्यतः मीथेन और कार्बन डाइऑक्साइड हो सकती हैं।
Q. स्वच्छता किसे कहते हैं?
Ans. व्यक्तिगत और सार्वजनिक स्थानों को साफ रखना, सुरक्षित शौचालयों का उपयोग करना तथा कचरे और अपशिष्ट जल का उचित निपटान करना स्वच्छता का हिस्सा है।
Q. खुले में शौच करने से क्या समस्याएँ हो सकती हैं?
Ans. खुले में शौच करने से जल और मिट्टी दूषित हो सकते हैं तथा हैजा, पेचिश और दस्त जैसी बीमारियाँ फैलने का खतरा बढ़ सकता है।
Q. नालियों में खाना पकाने का तेल और चिकनाई क्यों नहीं डालनी चाहिए?
Ans. तेल और चिकनाई ठंडी होकर पाइपों की दीवारों पर जम सकती हैं, जिससे नालियाँ बंद हो सकती हैं और सीवेज के प्रवाह में बाधा आती है।
Q. शौचालय में सैनिटरी नैपकिन और प्लास्टिक क्यों नहीं डालने चाहिए?
Ans. ये पदार्थ आसानी से विघटित नहीं होते और पाइपों तथा सीवर को अवरुद्ध कर सकते हैं। इन्हें उचित कूड़ेदान में डालना चाहिए।
Q. जलजनित रोग क्या हैं?
Ans. दूषित जल के सेवन या संपर्क से फैलने वाले रोग जलजनित रोग कहलाते हैं। उदाहरण के लिए हैजा, टाइफाइड और कुछ प्रकार के दस्त।
Q. अपशिष्ट जल का सुरक्षित निपटान क्यों जरूरी है?
Ans. अपरिष्कृत अपशिष्ट जल को सीधे नदियों या तालाबों में छोड़ने से जल प्रदूषण, जलीय जीवों को नुकसान और मानव स्वास्थ्य संबंधी समस्याएँ हो सकती हैं।
Q. अपशिष्ट जल कम करने और स्वच्छता बनाए रखने के चार उपाय बताइए।
Ans. पानी की बर्बादी रोकें, शौचालयों का सही उपयोग करें, तेल व ठोस कचरा नालियों में न डालें तथा अपशिष्ट जल का उचित उपचार और सुरक्षित निपटान सुनिश्चित करें।