Q. आँकड़ों का प्रबंधन क्या है?
Ans. आँकड़ों को एकत्र करना, व्यवस्थित करना, प्रस्तुत करना और उनका विश्लेषण करना आँकड़ों का प्रबंधन कहलाता है।
Q. आँकड़े किसे कहते हैं?
Ans. किसी विषय से संबंधित एकत्र की गई संख्यात्मक या अन्य जानकारी को आँकड़े कहते हैं।
Q. आँकड़ों को एकत्र करने का क्या उद्देश्य है?
Ans. किसी विषय के बारे में जानकारी प्राप्त करना और सही निष्कर्ष निकालना।
Q. आँकड़ों को व्यवस्थित करना क्यों आवश्यक है?
Ans. व्यवस्थित आँकड़ों को समझना, तुलना करना और उनका विश्लेषण करना आसान होता है।
Q. आवृत्ति किसे कहते हैं?
Ans. किसी मान के आँकड़ों में आने की संख्या उसकी आवृत्ति कहलाती है।
Q. आवृत्ति सारणी क्या है?
Ans. जिस सारणी में अलग-अलग मानों और उनकी आवृत्तियों को दर्शाया जाता है, उसे आवृत्ति सारणी कहते हैं।
Q. टैली चिह्नों का उपयोग क्यों किया जाता है?
Ans. टैली चिह्नों से आँकड़ों की गिनती और आवृत्ति दर्ज करना आसान होता है।
Q. दंड आलेख क्या है?
Ans. दंड आलेख में विभिन्न आँकड़ों को बराबर चौड़ाई वाले दंडों से प्रदर्शित किया जाता है।
Q. दंड आलेख में दंडों के बीच अंतर क्यों रखा जाता है?
Ans. दंड अलग-अलग श्रेणियों या मानों को दर्शाते हैं, इसलिए उनके बीच अंतर रखा जाता है।
Q. वृत्त आलेख क्या है?
Ans. वृत्त आलेख एक वृत्त को विभिन्न क्षेत्रों में बाँटकर आँकड़ों को दर्शाता है।
Q. वृत्त आलेख का पूरा कोण कितना होता है?
Ans. वृत्त का पूरा कोण 360° होता है।
Q. परास किसे कहते हैं?
Ans. आँकड़ों के सबसे बड़े और सबसे छोटे मान के अंतर को परास कहते हैं।
Q. माध्य क्या है?
Ans. सभी आँकड़ों के योग को आँकड़ों की कुल संख्या से भाग देने पर माध्य प्राप्त होता है।
Q. माध्यिका किसे कहते हैं?
Ans. आँकड़ों को आरोही या अवरोही क्रम में रखने पर बीच का मान माध्यिका कहलाता है।
Q. बहुलक क्या है?
Ans. आँकड़ों में सबसे अधिक बार आने वाला मान बहुलक कहलाता है।
Q. यदि आँकड़े 2, 4, 6 हों, तो माध्य क्या होगा?
Ans. माध्य = (2 + 4 + 6) / 3 = 4।
Q. आँकड़ों 3, 5, 7, 9, 11 की माध्यिका क्या है?
Ans. माध्यिका 7 है।
Q. आँकड़ों 2, 3, 3, 4, 5 का बहुलक क्या है?
Ans. बहुलक 3 है, क्योंकि यह सबसे अधिक बार आता है।
Q. आँकड़ों 5, 8, 12, 15 का परास क्या है?
Ans. परास = 15 - 5 = 10।
Q. आँकड़ों का चित्रात्मक प्रदर्शन क्यों उपयोगी है?
Ans. चित्रात्मक प्रदर्शन से आँकड़ों की तुलना, प्रवृत्तियों की पहचान और निष्कर्ष निकालना आसान होता है।